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नाइक नंद सिंह, 1/11वीं सिख रेजिमेंट

नाइक नंद सिंह, 1/11वीं सिख रेजिमेंट (विक्टोरिया क्रास मरणोपरांत) प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि: नायक नंद सिंह का जन्म सन 1914 ई. में ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत (अब पाकिस्तान में) के बहादुरपुर गाँव में एक सिख परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम सरदार भोला सिंह और माता का नाम श्रीमती ईश्वर कौर था। बचपन […]

सूबेदार खुशहाल सिंह (वी.सी.मरणोपरांत), 27वीं बॉम्बे पायनियर

सूबेदार खुशहाल सिंह (विक्टोरिया क्रास मरणोपरांत), 27वीं बॉम्बे पायनियर सूबेदार खुशहाल सिंह का जन्म ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत (अब पाकिस्तान में) के एक छोटे से गाँव में हुआ था। उनकी जन्मतिथि और प्रारंभिक जीवन के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन यह ज्ञात है कि उन्होंने युवावस्था में ही ब्रिटिश भारतीय सेना

द्वितीय विश्व युद्ध में असाधारण शौर्य एवं शहादत हेतु प्रदान किया जाने वाला सर्वोच्च वीरता सम्मान – विक्टोरिया क्रॉस (वी.सी.)

द्वितीय विश्व युद्ध में असाधारण शौर्य एवं शहादत हेतु प्रदान किया जाने वाला सर्वोच्च वीरता सम्मान – विक्टोरिया क्रॉस (वी.सी.) विक्टोरिया क्रॉस (वी.सी.) ब्रिटिश सशस्त्र बलों का सर्वोच्च और सबसे प्रतिष्ठित अलंकरण है। यह “शत्रु की उपस्थिति में” वीरता के लिए प्रदान किया जाता है। इसकी स्थापना 29 जनवरी 1856 को महारानी विक्टोरिया द्वारा क्रीमियन

अभियान –52 : रबाब से नगाड़े तक सिख इतिहास की अमर यात्रा 

अभियान –52 : रबाब से नगाड़े तक सिख इतिहास की अमर यात्रा  पंजाबी की एक अत्यंत सारगर्भित कहावत है— “सो हाथ रस्सा, सिरे ते गंड”, अर्थात किसी विस्तृत और गहन विषय को उसके मूल भाव सहित संक्षेप में प्रस्तुत करना। सिख इतिहास के विशाल सागर में ऐसे अनेक अभियान विद्यमान हैं, जिन्होंने समय की सीमाओं

ज्ञान, गुरमत और उज्ज्वल भविष्य का संगम : गुरु-सिख विद्यार्थियों हेतु शिक्षा–सेवा का प्रेरणादायी अभियान

ज्ञान, गुरमत और उज्ज्वल भविष्य का संगम : गुरु-सिख विद्यार्थियों हेतु शिक्षा–सेवा का प्रेरणादायी अभियान “सतिगुर की सेवा सफल है जे को करे चितु लाइ॥”(अंग क्रमांक 552) भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में शिक्षा को सदैव केवल आजीविका अर्जित करने का साधन नहीं माना गया, अपितु मनुष्य के समग्र विकास, चरित्र निर्माण और समाज

ਪ੍ਰਸੰਗ ਕ੍ਰਮਾਂਕ 17: ਜਥੇਦਾਰ ਸਾਹਿਬ ਦਾ ਪਰਿਵਾਰ ਤੰਬਾਕੂ ਕਿਉਂ ਪੀਂਦਾ ਹੈ?

ਪ੍ਰਸੰਗ ਕ੍ਰਮਾਂਕ 17: ਜਥੇਦਾਰ ਸਾਹਿਬ ਦਾ ਪਰਿਵਾਰ ਤੰਬਾਕੂ ਕਿਉਂ ਪੀਂਦਾ ਹੈ?   (ਸਫ਼ਰ-ਏ-ਪਾਤਸ਼ਾਹੀ ਨੌਵੀਂ — ਸ਼ਹੀਦੀ ਮਾਰਗ ਯਾਤਰਾ) ਸੰਗਤ ਜੀ, ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕਾ ਖਾਲਸਾ, ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕੀ ਫਤਹਿ। ਕਈ ਵਾਰ ਇਤਿਹਾਸ ਕੇਵਲ ਗ੍ਰੰਥਾਂ ਦੇ ਪੀਲੇ ਪੈ ਚੁੱਕੇ ਪੰਨਿਆਂ ਵਿੱਚ ਹੀ ਨਹੀਂ ਮਿਲਦਾ, ਉਹ ਟੁੱਟੇ ਹੋਏ ਘਰਾਂ ਦੀਆਂ ਦੀਵਾਰਾਂ ਵਿੱਚ, ਬੁੱਝ ਚੁੱਕੀਆਂ ਅੱਖਾਂ ਵਿੱਚ ਅਤੇ ਸਮੇਂ ਦੀ

माधव विज्ञान महाविद्यालय पूर्व छात्र संघ द्वारा विभूतियों का सम्मान: 

माधव विज्ञान महाविद्यालय पूर्व छात्र संघ द्वारा विभूतियों का सम्मान (पुराने साथी, सुनहरी यादें)  माधव विज्ञान महाविद्यालय, उज्जैन की गौरवशाली परंपरा केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रही है, अपितु इस महाविद्यालय ने ऐसे व्यक्तित्वों को जन्म दिया है जिन्होंने समाज, प्रशासन, राजनीति, सेवा और सांस्कृतिक चेतना के विविध क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर

प्रसंग क्रमांक 17: जत्थेदार साहिब का परिवार तम्बाकू क्यों पीता है?

प्रसंग क्रमांक 17: जत्थेदार साहिब का परिवार तम्बाकू क्यों पीता है? (सफ़र-ए-पातशाही नौवीं — शहीदी मार्ग यात्रा) संगत जी, वाहिगुरु जी का खालसा, वाहिगुरु जी की फतेह।कभी-कभी इतिहास केवल ग्रंथों के पीले पड़ चुके पन्नों में नहीं मिलता, वह टूटे हुए घरों की दीवारों में, बुझी हुई आँखों में, और समय की मार से बिखर

वणजारे: गुरु पंथ खालसा के अमर प्रहरी (शोध-पत्र) 

वणजारे: गुरु पंथ खालसा के अमर प्रहरी (शोध-पत्र)                                                           (इतिहास, शहादत और परंपरा) 1. प्रस्तावना भारतीय सामाजिक-सांस्कृतिक इतिहास में वणजारा समुदाय एक विशिष्ट स्थान रखता है। यह समुदाय

शहादत से राष्ट्र-निर्माण तक: ‘हिंद की चादर’ का अमर संदेश

शहादत से राष्ट्र-निर्माण तक: ‘हिंद की चादर’ का अमर संदेश भारत का इतिहास केवल राज सत्ता और साम्राज्यों का इतिहास नहीं है, अपितु उन दिव्य आत्माओं का इतिहास भी है, जिन्होंने सत्य, धर्म और मानवता की रक्षा के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग कर दिया। ऐसे ही युगपुरुष थे श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी,