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गुरु पंथ ख़ालसा की सशक्त भुजा: निर्मल पंथ (संप्रदाय)

गुरु पंथ ख़ालसा की सशक्त भुजा: निर्मल पंथ (संप्रदाय) निर्मल पंथ, ‘गुरु पंथ ख़ालसा’ की सशक्त भुजा, वास्तव में साधु, संत, महंत और विद्वानों का संप्रदाय है। इस संप्रदाय के गुरु सिखों ने पुरातन समय से ही अनेक प्रकार से ‘गुरु पंथ ख़ालसा’ की सेवा की है। सिख इतिहास और गुरमत साहित्य की सेवा–संभाल करने […]

सिख इतिहास का उपेक्षित अध्याय: सिकलीगर सिख

सिख इतिहास का उपेक्षित अध्याय: सिकलीगर सिख श्री गुरु नानक साहिब जी द्वारा प्रवर्तित निर्मल पंथ अर्थात गुरु पंथ खालसा में जात-पात, रंग, नस्ल, लिंग, भाषा, क्षेत्र, मज़हब अथवा किसी भी अन्य आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव स्वीकार्य नहीं है। यही कारण है कि मानव समाज के प्रत्येक वर्ग का गुरु पंथ खालसा के

BHULE-BISARE NANAK PANTHI

भूले – बिसरे नानक पंथी नानक पंथियों के जीवन-संघर्ष को निकट से देखकर और उसे गहराई से समझने के उपरांत, हमारी टीम खोज-विचार की ऐतिहासिक खोजों के माध्यम से गुरु पंथ खालसा के इन अत्यंत प्रिय, सम्मान के अधिकारी और साथ ही उपेक्षित नानक पंथियों के प्रति मेरी लेखनी की संवेदनाएँ एक सशक्त चेतावनी का

वणजारे: गुरु पंथ खालसा के अमर प्रहरी (इतिहास, शहादत और परंपरा)

वणजारे: गुरु पंथ खालसा के अमर प्रहरी (इतिहास, शहादत और परंपरा) ‘वणजारा’, ‘बनजारा’ या बंजारे शब्द का निर्माण ‘वणिक’ अथवा ‘बणिक’ शब्द से हुआ माना जाता है, जिसका अर्थ है—व्यापारी। बंजारे कोई साधारण व्यापारी नहीं, बल्कि प्राचीन आदिवासी क़बीले  के चक्रवर्ती व्यापारी थे। शब्द ‘वणजारा’ की उत्पत्ति ‘वण’ (पंजाबी ‘बण’—अर्थात जंगल) और ‘जारा’ (अर्थात घूमने

संशोधित सर्व कला समर्थ: धन्य – धन्य गुरु श्री तेग बहादर साहिब जी (शोध-पत्र)

संशोधित सर्व कला समर्थ: धन्य – धन्य गुरु श्री तेग बहादर साहिब जी (शोध-पत्र) DOWENLOAD भारत रत्न डॉक्टर भीमराव आंबेडकर और सिख धर्म

अमर शहीद भाई मतीदास और भाई सतीदास जी का अनमोल स्वर्णिम इतिहास (शोध-पत्र)

अमर शहीद भाई मतीदास और भाई सतीदास जी का अनमोल स्वर्णिम इतिहास (शोध-पत्र) DOWENLOAD संशोधित सर्व कला समर्थ: धन्य – धन्य गुरु श्री तेग बहादर साहिब जी (शोध-पत्र)

रबाबी भाई मरदाना का जीवन चरित्र और रबाब का सफर (शोध-पत्र)

रबाबी भाई मरदाना का जीवन चरित्र और रबाब का सफ़र DOWENLOAD अमर शहीद भाई मतीदास और भाई सतीदास जी का अनमोल स्वर्णिम इतिहास (शोध-पत्र)

ਪ੍ਰਸੰਗ ਕ੍ਰਮਾਂਕ 16: ਨੌਵੇਂ ਪਾਤਸ਼ਾਹ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਅੱਜ ਤੱਕ ਕਿਉਂ ਪਛਤਾਂਦਾ ਹੈ ਇਹ ਨਗਰ?(ਕਰਹਾਲੀ ਨਗਰ ਦਾ ਸੰਪੂਰਨ ਇਤਿਹਾਸ)

ਪ੍ਰਸੰਗ ਕ੍ਰਮਾਂਕ 16: ਨੌਵੇਂ ਪਾਤਸ਼ਾਹ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਅੱਜ ਤੱਕ ਕਿਉਂ ਪਛਤਾਂਦਾ ਹੈ ਇਹ ਨਗਰ?(ਕਰਹਾਲੀ ਨਗਰ ਦਾ ਸੰਪੂਰਨ ਇਤਿਹਾਸ)   (ਸਫ਼ਰ-ਏ-ਪਾਤਸ਼ਾਹੀ ਨੌਵੀਂ — ਸ਼ਹੀਦੀ ਮਾਰਗ ਯਾਤਰਾ) ਅੱਜ ਅਸੀਂ ਇਤਿਹਾਸ ਦੀ ਉਸ ਪੀੜ੍ਹ ਨਾਲ ਸੰਵਾਦ ਕਰਨ ਜਾ ਰਹੇ ਹਾਂ, ਜੋ ਸਮੇਂ ਦੀਆਂ ਪਰਤਾਂ ਹੇਠ ਦਬੀ ਹੋਈ ਹੈ। ਅੱਜ ਚਰਚਾ ਦਾ ਕੇਂਦਰ ਹੈ, ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਕਰਹਾਲੀ ਸਾਹਿਬ ਅਤੇ ਉਸ ਨਾਲ

प्रसंग क्रमांक 16: नौवें पातशाह के पश्चात आज तक क्यों पछताता है यह नगर? (करहाली नगर का संपूर्ण इतिहास)

प्रसंग क्रमांक 16: नौवें पातशाह के पश्चात आज तक क्यों पछताता है यह नगर? (करहाली नगर का संपूर्ण इतिहास) (सफ़र-ए-पातशाही नौवीं — शहीदी मार्ग यात्रा) आज हम इतिहास की उस पीड़ा से संवाद करेंगे, जो समय की परतों में दबी हुई है। आज चर्चा का केंद्र है- गुरुद्वारा करहाली साहिब और उससे जुड़ा वह नगर,

“शोध पत्र (Research Papers) – टीम खोज-विचार”

“शोध पत्र (Research Papers) – टीम खोज-विचार” इस कॉलम के अंतर्गत टीम खोज-विचार द्वारा रचित एवं संकलित उन सभी शोध-पत्रों को क्रमबद्ध रूप में प्रकाशित किया जा रहा है, जो विभिन्न अवसरों, संगोष्ठियों, व्याख्यान-श्रृंखलाओं तथा विशेष परियोजनाओं के अंतर्गत तैयार किए गए हैं। प्रत्येक शोध-पत्र अपने विषय, दृष्टि और निष्कर्षों के माध्यम से ज्ञान-परंपरा को