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बीसवीं शताब्दी में गुरुधामों का अभिलेखन: भाई धन्ना सिंह चहल (पटियालवी) की साइकिल यात्राओं का ऐतिहासिक विश्लेषण

बीसवीं शताब्दी में गुरुधामों का अभिलेखन: भाई धन्ना सिंह चहल (पटियालवी) की साइकिल यात्राओं का ऐतिहासिक विश्लेषण सारांश (Abstract) बीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में जब भारत अखंड भू-राजनीतिक स्वरूप में विद्यमान था और संचार-सुविधाएं अत्यंत सीमित थीं, उस समय भाई धन्ना सिंह चहल (पटियालवी) ने 11 मार्च 1930 से 26 जून 1935 तक लगभग पाँच […]

संशोधित सर्व कला समर्थ: धन्य – धन्य गुरु श्री तेग बहादर साहिब जी (शोध-पत्र)

संशोधित सर्व कला समर्थ: धन्य – धन्य गुरु श्री तेग बहादर साहिब जी (शोध-पत्र) DOWENLOAD भारत रत्न डॉक्टर भीमराव आंबेडकर और सिख धर्म

अमर शहीद भाई मतीदास और भाई सतीदास जी का अनमोल स्वर्णिम इतिहास (शोध-पत्र)

अमर शहीद भाई मतीदास और भाई सतीदास जी का अनमोल स्वर्णिम इतिहास (शोध-पत्र) DOWENLOAD संशोधित सर्व कला समर्थ: धन्य – धन्य गुरु श्री तेग बहादर साहिब जी (शोध-पत्र)

रबाबी भाई मरदाना का जीवन चरित्र और रबाब का सफर (शोध-पत्र)

रबाबी भाई मरदाना का जीवन चरित्र और रबाब का सफ़र DOWENLOAD अमर शहीद भाई मतीदास और भाई सतीदास जी का अनमोल स्वर्णिम इतिहास (शोध-पत्र)

“शोध पत्र (Research Papers) – टीम खोज-विचार”

“शोध पत्र (Research Papers) – टीम खोज-विचार” इस कॉलम के अंतर्गत टीम खोज-विचार द्वारा रचित एवं संकलित उन सभी शोध-पत्रों को क्रमबद्ध रूप में प्रकाशित किया जा रहा है, जो विभिन्न अवसरों, संगोष्ठियों, व्याख्यान-श्रृंखलाओं तथा विशेष परियोजनाओं के अंतर्गत तैयार किए गए हैं। प्रत्येक शोध-पत्र अपने विषय, दृष्टि और निष्कर्षों के माध्यम से ज्ञान-परंपरा को

लेखन कला और उसकी विधाएँ

लेखन कला और उसकी विधाएँ शोध आलेख (अनुभव लेखन)- सारांश (Abstract):   यह शोध आलेख “लेखन कला और उसकी विधाएँ” के अंतर्गत लेखन की मूल प्रेरणा-संवेदनशीलता और सृजनशीलता की भूमिका पर केंद्रित है। लेख में यह विश्लेषित किया गया है कि किस प्रकार सामाजिक, राजनीतिक या मानवीय घटनाएं एक व्यक्ति के अंतर्मन को प्रभावित कर एक

 इंसानियत की ज़मीर के रखवाले: श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी (शोध पत्र)

 इंसानियत की ज़मीर के रखवाले: श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी (शोध पत्र) (श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350वें शहीदी वर्ष पर्व पर विशेष) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ 1. प्रस्तावना सिख धर्म को आज समस्त विश्व में सबसे आधुनिक, जीवंत और मानवतावादी धर्म के रूप में स्वीकार किया गया है। गुरु पंथ खालसा

कामागाटा मारू: सिखों के संघर्ष की अद्भुत-अनोखी दास्तान (शोध पत्र)

कामागाटा मारू: सिखों के संघर्ष की अद्भुत-अनोखी दास्तान (शोध पत्र) सवैया॥ देह सिवा बरु मोहि इहै सुभ करमन ते कबहूं न टरो॥ न डरो अरि सो जब जाइ लरो निसचै करि अपुनी जीत करो॥ अरु सिख हौ आपने ही मन को इह लालच हउ गन तउ उचरो॥ न डरो अरि सो जब जाइ लरो निसचै

श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की वाणी में भक्त कबीर–

श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की वाणी में भक्त कबीर– भूमिका— ੴ सतिनामु करता पुरखु निरभउ निरवैरु अकाल मूरति अजूनी सैभं गुरप्रसादि॥जपु॥ अब तउ जाइ चढे सिंघासनि मिले है सारिंगपानी॥ राम कबीरा एक भए है कोइ न सकै पछानी॥ (अंग क्रमांक 969) अर्थात भक्त कबीर जी कहते है! अब परमात्मा की प्राप्ति हो गई है

सिखों की पारंपरिक युद्ध-कला : गतका (शोध पत्र)

सिखों की पारंपरिक युद्ध-कला : गतका (शोध पत्र) असि क्रिपान खंडों खड़ग तुपक तबर अरु तीर‌॥ सैफ सरोही सैहथी यहै हमारे पीर॥ (ससत्र नाम माला) ‘गुरु पंथ खालसा’ की धार्मिक युद्ध-कला ‘गतका’ की समस्त विश्व में एक विशिष्ट पहचान है। इस कला ने युद्ध-कौशल के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं,