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राग टोडी महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी

राग टोडी महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी ੴ सतिगुरु प्रसादि ॥ टोडी महला ९ कहउ कहा अपनी अधमाई ॥ उरझिओ कनक कामनी के रस नह कीरति प्रभ गाई ॥१॥ रहाउ ॥ जग झूठे कउ साचु जानि कै ता सिउ रुच उपजाई ॥ दीन बंध सिमरिओ नही कबहू होत जु संगि सहाई […]

राग जैतसरी महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी

राग जैतसरी महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी ੴ सतिगुरु प्रसादि ॥ जैतसरी महला ९ भूलिओ मनु माइआ उरझाइओ॥ जो जो करम कीओ लालच लगि तिह तिह आपु बंधाइओ ॥१॥ रहाउ ॥ समझ न परी बिखै रस रचिओ जसु हरि को बिसराइओ ॥ संगि सुआमी सो जानिओ नाहिन बनु खोजन कउ धाइओ

राग धनासरी महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी

राग धनासरी महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी ੴ सतिगुरु प्रसादि ॥ धनासरी महला ९ ॥ काहे रे बन खोजन जाई ॥ सरब निवासी सदा अलेपा तोही संगि समाई ॥१॥ रहाउ ॥ पुहप मधि जिउ बासु बसतु है मुकर माहि जैसे छाई ॥ तैसे ही हरि बसे निरंतरि घट ही खोजहु भाई

राग सोरठि महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी

राग सोरठि महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी सोरठि महला ९ ੴ सतिगुरु प्रसादि ॥ रे मन राम सिउ करि प्रीति ॥ सवन गोबिंद गुनु सुनउ अरु गाउ रसना गीति ॥१॥ रहाउ ॥ करि साधसंगति सिमरु माधो होहि पतित पुनीत ॥ कालु बिआलु जिउ परिओ डोले मुख पसारे मीत ॥१॥ आजु कालि

राग बिहागड़ा महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी

राग बिहागड़ा महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी ੴ सतिगुरु प्रसादि ॥ रागु बिहागड़ा महला ९ ॥ हरि की गति नहि कोऊ जानै ॥ जोगी जती तपी पचि हारे अरु बह लोग सिआने ॥१॥ रहाउ ॥ छिन महि राउ रंक कउ करई राउ रंक करि डारे ॥ रीते भरे भरे सखनावै यह

राग देवगंधारी महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी

राग देवगंधारी महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी   ੴ सतिगुरु प्रसादि ॥  रागु देवगंधारी महला ९ ॥ यह मनु नैक न कहिओ करै ॥ सीख सिखाइ रहिओ अपनी सी दुरमति ते न टरे ॥१॥ रहाउ ॥ मदि माइआ कै भइओ बावरी हरि जसु नहि उचरै॥ करि परपंचु जगत कउ डहकै अपनो

राग आसा महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी

राग आसा महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी ੴ सतिगुरु प्रसादि ॥ रागु आसा महला ९ ॥ बिरथा कहउ कउन सिउ मन की ॥ लोभि गमिओ दस ह दिस धावत आसा लागिश्री धन की ॥१॥ रहाउ ॥ सुख कै हेति बहुतु दुखु पावत सेव करत जन जन की ॥ दुआरहि दुआरि सुआन

राग आसा महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी

राग आसा महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी ੴ सतिगुरु प्रसादि ॥  रागु आसा महला ६ ॥ बिरथा कहउ कउन सिउ मन की ॥ लोभि गमिओ दस ह दिस धावत आसा लागिश्री धन की ॥१॥ रहाउ ॥ सुख कै हेति बहुतु दुखु पावत सेव करत जन जन की ॥ दुआरहि दुआरि सुआन

राग गउड़ी महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी

राग गउड़ी महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी गुरुवाणी: श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी राग गउड़ी महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी ੴ सतिगुरु प्रसादि ॥ राग गउड़ी महला ९ ॥ साधो मन का मानु तिआगउ ॥ कामु क्रोधु संगति दुरजन की ता ते अहिनिसि भागउ

गुरुवाणी : श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी

गुरुवाणी : श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी भूमिका- श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी केवल एक धर्मग्रंथ नहीं अपितु मानवता के लिए उच्चतम आध्यात्मिक चेतना का शाश्वत घोष है। इस पावन ग्रंथ में संकलित गुरुवाणी न किसी काल की बंधक है, न किसी भूगोल की, यह सीधे मनुष्य के अंतःकरण से संवाद करती है। इसी