Arsh

सलोक महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी

सलोक महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब ੴ सतिगुरु प्रसादि ॥ (श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी, अंग क्रमांक १४२६) सलोक महला ९ ॥ गुन गोबिंद गाइओ नही जनमु अकारथ कीनु ॥ कहु नानक हरि भजु मना जिह बिधि जल कउ मीनु ॥१॥ बिखिअन सिउ काहे रचिओ निमख न होहि उदासु ॥ कहु नानक भजु हरि […]

राग बसंत महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी

राग बसंत महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी बसंतु महला ९ ॥ पापी हीऐ मै कामु बसाइ ॥ मनु चंचलु या ते गहिओ न जाइ ॥१॥ रहाउ ॥ जोगी जंगम अरु संनिआस ॥ सभ ही परि डारी इह फास ॥१॥ जिहि जिहि हरि को नामु समारि ॥ ते भव सागर

राग जैजावंती महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी

राग जैजावंती महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी रागु जैजावंती महला ९ ॥ रामु सिमरि रामु सिमरि इहै तेरे काजि है ॥ माइआ को संगु तिआगु प्रभ जू की सरनि लागु ॥ जगत सुख मानु मिथिआ झूठी सभ साजु है ॥१॥ रहाउ ॥ सुपने जिउ धनु पछानु काहे परि करत

राग सारंग महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी

राग सारंग महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी ੴ सतिगुरु प्रसादि ॥ रागु सारंग महला ९ ॥ हरि बिनु तेरो को न सहाई ॥ कां की मात पिता सुत बनिता को काहू को भाई ॥१॥ रहाउ ॥ धनु धरनी अरु संपति सगरी जो मानिओ अपनाई ॥ तन छूटै कछु संगि न चालै

राग बसंत हिंडोल महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी

राग बसंत हिंडोल महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी ੴ सतिगुरु प्रसादि ॥ रागु बसंतु हिंडोल महला ९ ॥ साधो इहु तनु मिथिआ जानउ ॥ या भीतरि जो रामु बसतु है साचो ताहि पछानो ॥१॥ रहाउ ॥ इहु जगु है संपति सुपने की देखि कहा ऐड़ानो ॥ संगि तिहारे कछू न चाले

राग मारू महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी

राग मारू महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी मारू महला ९ हरि को नामु सदा सुखदाई ॥ जा कउ सिमरि अजामलु उधरिओ गनिका हू गति पाई ॥१॥ रहाउ ॥ पंचाली कउ राज सभा महि राम नाम सुधि आई ॥ ता को दूखु हरिओ करुणा मै अपनी पैज बढाई ॥१॥ जिह

राग रामकली महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी

राग रामकली महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी ੴ सतिगुरु प्रसादि ॥ रागु रामकली महला ९ तिपदे ॥ रे मन ओट लेहु हरि नामा ॥ जा कै सिमरनि दुरमति नासै पावहि पटु निरबाना ॥१॥ रहाउ ॥ बडभागी तिह जन कर जानहु जो हरि के गुन गावै ॥ जनम जनम के पाप ‘खोइ

राग बिलावलु महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी

राग बिलावलु महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी ੴ सतिगुरु प्रसादि ॥ रागु बिलावलु महला ९ दुख हरता हरि नामु पछानो ॥ अजामलु गनिका जिह सिमरत मुकत भए जीअ जानो ॥१॥ रहाउ ॥ गज की त्रास मिटी छिनहू महि जब ही रामु बखानो ॥ नारद कहत सुनत धूअ बारिक भजन माहि लपटानी

राग तिलंग महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी

राग तिलंग महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी ੴ सतिगुरु प्रसादि ॥ तिलंग महला ९ चेतना है तउ चेत लै निसि दिनि मै प्रानी ॥ छिनु छिनु अउध बिहातु है फूटै घट जिउ पानी ॥१॥ रहाउ ॥ हरि गुन काहि न गावही मूरख अगिआना ॥ झूठे लालचि लागि कै नहि मरनु पछाना

राग टोडी महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी

राग टोडी महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी ੴ सतिगुरु प्रसादि ॥ टोडी महला ९ कहउ कहा अपनी अधमाई ॥ उरझिओ कनक कामनी के रस नह कीरति प्रभ गाई ॥१॥ रहाउ ॥ जग झूठे कउ साचु जानि कै ता सिउ रुच उपजाई ॥ दीन बंध सिमरिओ नही कबहू होत जु संगि सहाई