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वणजारे: गुरु पंथ खालसा के अमर प्रहरी (शोध-पत्र) 

वणजारे: गुरु पंथ खालसा के अमर प्रहरी (शोध-पत्र)                                                           (इतिहास, शहादत और परंपरा) 1. प्रस्तावना भारतीय सामाजिक-सांस्कृतिक इतिहास में वणजारा समुदाय एक विशिष्ट स्थान रखता है। यह समुदाय […]

भारतीय सांस्कृतिक धरोहर और परंपराओं में हिंदी का महत्व

भारतीय सांस्कृतिक धरोहर और परंपराओं में हिंदी का महत्व भारत की आत्मा उसकी भाषाओं में बसती है और उन भाषाओं में हिंदी वह सेतु है, जिसने विविधता में एकता के इस विराट राष्ट्र को वैचारिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक सूत्र में बाँधने का ऐतिहासिक कार्य किया है। यद्यपि प्रत्येक समाज, प्रत्येक क्षेत्र और प्रत्येक समुदाय अपनी–अपनी

राग बसंत महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी

राग बसंत महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी बसंतु महला ९ ॥ पापी हीऐ मै कामु बसाइ ॥ मनु चंचलु या ते गहिओ न जाइ ॥१॥ रहाउ ॥ जोगी जंगम अरु संनिआस ॥ सभ ही परि डारी इह फास ॥१॥ जिहि जिहि हरि को नामु समारि ॥ ते भव सागर

राग सारंग महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी

राग सारंग महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी ੴ सतिगुरु प्रसादि ॥ रागु सारंग महला ९ ॥ हरि बिनु तेरो को न सहाई ॥ कां की मात पिता सुत बनिता को काहू को भाई ॥१॥ रहाउ ॥ धनु धरनी अरु संपति सगरी जो मानिओ अपनाई ॥ तन छूटै कछु संगि न चालै

राग टोडी महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी

राग टोडी महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी ੴ सतिगुरु प्रसादि ॥ टोडी महला ९ कहउ कहा अपनी अधमाई ॥ उरझिओ कनक कामनी के रस नह कीरति प्रभ गाई ॥१॥ रहाउ ॥ जग झूठे कउ साचु जानि कै ता सिउ रुच उपजाई ॥ दीन बंध सिमरिओ नही कबहू होत जु संगि सहाई

राग आसा महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी

राग आसा महला ९ में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी ੴ सतिगुरु प्रसादि ॥ रागु आसा महला ९ ॥ बिरथा कहउ कउन सिउ मन की ॥ लोभि गमिओ दस ह दिस धावत आसा लागिश्री धन की ॥१॥ रहाउ ॥ सुख कै हेति बहुतु दुखु पावत सेव करत जन जन की ॥ दुआरहि दुआरि सुआन

गुरुवाणी : श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी

गुरुवाणी : श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी भूमिका- श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी केवल एक धर्मग्रंथ नहीं अपितु मानवता के लिए उच्चतम आध्यात्मिक चेतना का शाश्वत घोष है। इस पावन ग्रंथ में संकलित गुरुवाणी न किसी काल की बंधक है, न किसी भूगोल की, यह सीधे मनुष्य के अंतःकरण से संवाद करती है। इसी

ਰਾਗ ਆਸਾ ਮਹਿਲਾ ੯ ਵਿਚ ਸ਼੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਤੇਗ ਬਹਾਦਰ ਸਾਹਿਬ ਜੀ ਦੀ ਬਾਣੀ

ਰਾਗ ਬਿਹਾਗੜਾ ਮਹਿਲਾ ੯ ਵਿਚ ਸ਼੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਤੇਗ ਬਹਾਦਰ ਸਾਹਿਬ ਜੀ ਦੀ ਬਾਣੀ ੴ ਸਤਿਗੁਰਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ਰਾਗੁ ਬਿਹਾਗੜਾ ਮਹਲਾ ੯ ॥ ਹਰਿ ਕੀ ਗਤਿ ਨਹਿ ਕੋਊ ਜਾਨੈ ॥ ਜੋਗੀ ਜਤੀ ਤਪੀ ਪਚਿ ਹਾਰੇ ਅਰੁ ਬਹੁ ਲੋਗ ਸਿਆਨੇ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥ ਛਿਨ ਮਹਿ ਰਾਉ ਰੰਕ ਕਉ ਕਰਈ ਰਾਉ ਰੰਕ ਕਰਿ ਡਾਰੇ ॥ ਰੀਤੇ ਭਰੇ ਭਰੇ ਸਖਨਾਵੈ

ਰਾਗ ਗਉੜੀ ਮਹਿਲਾ ੯ ਵਿਚ ਸ਼੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਤੇਗ ਬਹਾਦਰ ਸਾਹਿਬ ਜੀ ਦੀ ਬਾਣੀ

ਗੁਰੂਬਾਣੀ: ਸ਼੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਤੇਗ ਬਹਾਦਰ ਸਾਹਿਬ ਜੀ ਰਾਗ ਗਉੜੀ ਮਹਿਲਾ ੯ ਵਿਚ ਸ਼੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਤੇਗ ਬਹਾਦਰ ਸਾਹਿਬ ਜੀ ਦੀ ਬਾਣੀ ਕਾਮੁ ਕ੍ਰੋਧੁ ਸੰਗਤਿ ਦੁਰਜਨ ਕੀ ਤਾ ਤੇ ਅਹਿਨਿਸਿ ਭਾਗਉ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥ ਸੁਖੁ ਦੁਖੁ ਦੋਨੋ ਸਮ ਕਰਿ ਜਾਨੈ ਅਉਰੁ ਮਾਨੁ ਅਪਮਾਨਾ ॥ ਹਰਖ ਸੋਗ ਤੇ ਰਹੈ ਅਤੀਤਾ ਤਿਨਿ ਜਗਿ ਤਤੁ ਪਛਾਨਾ ॥੧॥ ਉਸਤਤਿ ਨਿੰਦਾ ਦੋਊ