Gurbani and sikh ithas-गुरुवाणी और सिख इतिहास

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इंसानियत की जमीर के रखवाले: श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी

ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ चलते–चलते. . . (गुरु श्री तेग बहादर साहिब जी के 346 शहीदी गुरु पर्व पर विशेष)– इंसानियत की जमीर के रखवाले: श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी। वाहिगुरु जी का ख़ालसा, वाहिगुरु जी की फतेह। सिख धर्म के नौवें गुरु अर्थात् नौवीं पातशाही ‘धर्म की चादर, श्री गुरु तेग बहादुर साहिब […]

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धन्य–धन्य गुरु श्री ग्रंथ साहिब जी और आजादी की अभिव्यक्ति

श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी और आजादी की अभिव्यक्ति ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ चलते–चलते. . . . (टीम खोज–विचार का उपक्रम) अप्रैल सन् 1699 ई. को बैसाखी दिवस पर करुणा, कलम और कृपाण के धनी, दशमेश पिता ‘श्री गुरु गोविंद सिंह साहिब जी’ के द्वारा ‘गुरु पंथ ख़ालसा’ की सर्जना कर प्रथम पांच प्यारों को

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भेषी (भेखी) सिख, सिख को न मारे तो कौम कभी न हारे (भाग–2)

ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ दीर्घ लेख चलते–चलते. . . . (टीम खोज–विचार की पहेल) भेषी (भेखी) सिख, सिख को न मारे तो कौम कभी न हारे (भाग–2) (टीम खोज–विचार की पहेल) भेषी (भेखी) सिख, सिख को न मारे तो कौम कभी न हारे (भाग–2) इस लेख के भाग–2 में भेषी (भेखी) सिख और ‘गुरु पंथ

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भेषी (भेखी) सिक्ख, सिक्ख को न मारे तो कौम कभी न हारे (भाग-1)

ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ दीर्घ लेख चलते–चलते. . . .(टीम खोज–विचार का उपक्रम) भेषी (भेखी) सिक्ख, सिक्ख को न मारे तो कौम कभी न हारे (भाग-1) (नोट— लखीमपुर खीरी (उत्तर प्रदेश) में जो सिख किसान शहीद हुए, उन्हें समर्पित है यह लेख)। (टीम खोज–विचार की पहेल) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ दीर्घ लेख चलते-चलते. . .

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शहीद

ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ चलते–चलते. . . . (टीम खोज–विचार की पहेल) शहीद (नोट— लखीमपुर खीरी (उत्तर प्रदेश) में जो सिख किसान शहीद हुए, उन्हें समर्पित है यह लेख)। सलोक कबीर॥ गगन दमामा बाजिओ परिओ नीसानै घाउ॥ खेतु जु माँडिओ सूरमा अब जूझन को दाउ॥ सूरा सो पहिचानीऐ जु लरै दीन के हेत॥ पुरजा पुरजा

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गुरु घर की बरकत

ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ अनुभव लेखन– चलते–चलते. . . (टीम खोज–विचार की पहेल) गुरु घर की बरकत ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ अनुभव लेखन चलते–चलते. . . (टीम खोज–विचार का उपक्रम) अपने संघर्ष के दिनों में नौकरी के सिलसिले में मुझे दुबई स्थित एक किराए की सदनिका में कुछ समय तक पाकिस्तानियों के साथ निवास करने

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सतगुरु की सेवा सफल है

ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ चलते–चलते. . . . (टीम खोज–विचार का पहेल) सतगुरु की सेवा सफल है ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ चलते–चलते. . . . (टीम खोज–विचार की पहेल) विगत वर्ष नवंबर में देहरादून से चंडीगढ़ की ओर अपनी कार से यात्रा कर रहा था। वैसे तो यह सफर केवल 4 से 5 घंटे का

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प्रकाश पर्व विशेष: बाबा श्री चंद जी

ੴ सतिगुर प्रसादि ॥चलते-चलते. . . .(टीम खोज-विचार की पहेल) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ चलते–चलते . . . . (टीम खोज–विचार की पहेल) प्रकाश पर्व विशेष: बाबा श्री चंद जी ‘श्री गुरु नानक देव साहिब जी’ और माता सुलखनी जी के ज्येष्ठ सुपुत्र बाबा श्री चंद मुनि जी का आविर्भाव संवत सन् 1551 भाद्रपद शुक्ला

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कायनात के गुरु: गुरु श्री ग्रंथ साहिब जी

ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ चलते–चलते. . . . (टीम खोज–विचार की पहेल) कायनात के गुरु: श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी संपूर्ण कायनात के गुरु, ‘श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी’ की संपादना की महान सेवा सिख धर्म के संस्थापक प्रथम गुरु, ‘श्री गुरु नानक देव साहिब जी’ से ही प्रारंभ हो चुकी थी। ‘श्री गुरु नानक

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श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में प्रकृति की महिमा

ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ चलते–चलते. . . . (टीम खोज–विचार की पहेल) श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में प्रकृति की महिमा वर्षा ऋतु के इन सावन–भादो के महीनों में प्रकृति ने धरती को अपनी गोदी में समेट कर चारों और एक हरियाली की चादर फैला दी है। रंग बिरंगे फूल और पत्तियां मानों जैसे इस

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