BHULE BISARE NANAK PANTHI

Under this column, historical information about the forgotten and lesser-known Nanak Panthi Sikhs will be presented.

सिंधी सिख : इतिहास, आस्था और समकालीन यथार्थ

सिंधी सिख : इतिहास, आस्था और समकालीन यथार्थ सिंधी सिखों का संबंध सिंध प्रांत से है, जो वर्तमान में पाकिस्तान में स्थित है। सन 1947 ई. से पूर्व, जब देश का विभाजन नहीं हुआ था, उस समय सिंध प्रांत में हिंदुओं और मुसलमानों की जनसंख्या का अनुपात लगभग 20% और 80% था। सिंध प्रांत की […]

उदासी संप्रदाय: उत्पत्ति, परंपरा और ऐतिहासिक विकास

उदासी संप्रदाय: उत्पत्ति, परंपरा और ऐतिहासिक विकास (तप, त्याग और सिक्खी की सेवा का इतिहास) उदासी संप्रदाय: उत्पत्ति, परंपरा और ऐतिहासिक विकास (तप, त्याग और सिक्खी की सेवा का इतिहास) बाबा श्रीचंद जी के समय समाज में अज्ञानता का व्यापक प्रभुत्व था। उन्होंने अपने तपस्वी और प्रभावशाली जीवन के माध्यम से भारतीय उपमहाद्वीप में फैली

 दक्खिनी (दक्षिणी) सिख : हजूरी संगत

 दक्खिनी (दक्षिणी) सिख : हजूरी संगत “दक्खिनी” शब्द, जिसे सिख समाज के कुछ वर्गों द्वारा कभी-कभी उपहास के भाव से प्रयुक्त किया जाता है, अपने वास्तविक अर्थ में केवल उस भौगोलिक क्षेत्र की ओर संकेत करता है, जहाँ ये सिख निवास करते हैं। उर्दू भाषा में “दक्षिण” का तात्पर्य दक्षिण दिशा से है। अविभाजित भारतीय

गुरु पंथ ख़ालसा की सशक्त भुजा: निर्मल पंथ (संप्रदाय)

गुरु पंथ ख़ालसा की सशक्त भुजा: निर्मल पंथ (संप्रदाय) निर्मल पंथ, ‘गुरु पंथ ख़ालसा’ की सशक्त भुजा, वास्तव में साधु, संत, महंत और विद्वानों का संप्रदाय है। इस संप्रदाय के गुरु सिखों ने पुरातन समय से ही अनेक प्रकार से ‘गुरु पंथ ख़ालसा’ की सेवा की है। सिख इतिहास और गुरमत साहित्य की सेवा–संभाल करने

सिख इतिहास का उपेक्षित अध्याय: सिकलीगर सिख

सिख इतिहास का उपेक्षित अध्याय: सिकलीगर सिख श्री गुरु नानक साहिब जी द्वारा प्रवर्तित निर्मल पंथ अर्थात गुरु पंथ खालसा में जात-पात, रंग, नस्ल, लिंग, भाषा, क्षेत्र, मज़हब अथवा किसी भी अन्य आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव स्वीकार्य नहीं है। यही कारण है कि मानव समाज के प्रत्येक वर्ग का गुरु पंथ खालसा के

BHULE-BISARE NANAK PANTHI

भूले – बिसरे नानक पंथी भूमिका- नानक पंथियों के जीवन-संघर्ष को निकट से देखकर और उसे गहराई से समझने के उपरांत, इस पुस्तक के माध्यम से मेरे लिए अत्यंत प्रिय, सम्मान की अधिकारी और साथ ही उपेक्षित इन नानक पंथियों के प्रति मेरी लेखनी की संवेदनाएँ एक सशक्त चेतावनी का रूप ले लेती हैं। इस

वणजारे: गुरु पंथ खालसा के अमर प्रहरी (इतिहास, शहादत और परंपरा)

वणजारे: गुरु पंथ खालसा के अमर प्रहरी (इतिहास, शहादत और परंपरा) ‘वणजारा’, ‘बनजारा’ या बंजारे शब्द का निर्माण ‘वणिक’ अथवा ‘बणिक’ शब्द से हुआ माना जाता है, जिसका अर्थ है—व्यापारी। बंजारे कोई साधारण व्यापारी नहीं, बल्कि प्राचीन आदिवासी क़बीले  के चक्रवर्ती व्यापारी थे। शब्द ‘वणजारा’ की उत्पत्ति ‘वण’ (पंजाबी ‘बण’—अर्थात जंगल) और ‘जारा’ (अर्थात घूमने