अर्श की कलम से. . . Arsh ki kalam se. . .

अल्प परिचय: हास्याचार्य पंडित ओम् व्यास ओम्

भूतभावन बाबा महाकाल की नगरी उज्जयिनी में मालवा की माटी के लाल ‘हास्य आचार्य’ पंडित ओम् व्यास ओम् का जन्म 25 जून सन् 1961 ई. में हुआ था। आप जी ने हिंदी माध्यम से ही अपने विद्यालयीन एवं महाविद्यालयीन शिक्षाओं को पूर्ण किया था। आप जी ने एम. काम. एल.एल.बी. तक अपनी शिक्षा ग्रहण कर […]

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सरसेनापति हिंदू हृदय सम्राट स्वर्गीय बालासाहेब जी ठाकरे के जन्मोत्सव पर विशेष (दिनांक 23 जनवरी)।

सरसेनापति हिंदू हृदय सम्राट स्वर्गीय बालासाहेब जी ठाकरे के जन्मोत्सव पर विशेष (दिनांक 23 जनवरी)। ‘जमलेल्या माझ्या तमाम हिंदू बांधवांनो, भगिनींनो आणि मातानों’! अर्थात एकत्रित मेरे तमाम हिंदू भाई बहनों और माताओं यह शब्द कानों को सुनाई पड़ते ही सामने एकत्रित लाखों का जनसमुदाय स्तब्ध हो जाता था, एक निश्चल सा शांत माहौल! और आने

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आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष– ‘जश्न-ए-आजादी’

आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष– ‘जश्न-ए-आजादी’ 15 अगस्त सन् 2022 ई. सोमवार के दिन हमारे संपूर्ण देश में आजादी का अमृत महोत्सव बड़े हर्षोल्लास और उत्साह से मनाया जा रहा है। इसके पूर्व हमारे देश के लोगों ने कोरोना संक्रमण की महामारी को अत्यंत वेदना से झेला है। आज इस उत्सव पूर्ण माहौल में

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बाप्पा मोरया रे. . . . .

बाप्पा मोरया रे. . . . . चौसष्ट कला और चौदाह विद्या के अधिपती यानिकी गणपती, बप्पा के अनेक पर्यायवाची नाम व रूप है, बप्पा को ओमकार, प्रथमेश, भालचन्द्र, विघ्नहर्ता के नाम से भी जाना जाता है, भक्तों की प्रार्थना पर सदा उन में समाने वाला यह सुखकर्ता बुद्धी का देव है। श्री स्वामी समर्थ

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हिंदी दिवस विशेष

हिंदी दिवस विशेष पूरे विश्व में सबसे अधिक बोली, पढ़ी, लिखी और समझी जाने वाली हमारी ‘राजभाषा’ हिंदी के प्रचार–प्रसार के लिए प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर के दिवस को ‘हिंदी दिवस’ के रूप में पूरे देश में ‘हर्षोल्लास’ के साथ मनाया जाता है। 14 सितंबर सन् 1950 ई. को संविधान सभा में हिंदी को ‘राजभाषा’

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कड़ाह-प्रसाद (धियावल) का महत्व

कड़ाह-प्रसाद (धियावल) का महत्व कोरोना संक्रमण का प्रादुर्भाव देश में दिन–प्रतिदिन कम होता जा रहा है। संकट के इस समय के पश्चात आत्मिक शांती हेतु गुरुद्वारों में भी रौनक बढ़ने लगी है। जब हम गुरु घर (गुरुद्वारों) में पहुंचकर ‘श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी’ के समक्ष नतमस्तक होकर मत्था टेकते हैं और गुरु जी का

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रमैय्या-वस्तावैय्या. . .रमैय्या-वस्तावैय्या

रमैय्या–वस्तावैय्या. . .रमैय्या–वस्तावैय्या भारत जैसे विशाल देश में बॉलीवुड में रचित पुराने गाने, गीत, संगीत का निश्चित ही अपना इतिहास और महत्व है। हमारे जमाने के श्रोताओं के लिए यह सभी बेहतरीन दिन – रात मुंह पर चढ़े रहने वाले गानों की स्मृतियां सचमुच अद्भुत है। यह मधुर स्मृतियाँ ऐसी है, जैसे भूतकाल के संदर्भ

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मित्रता दिवस पर विशेष

मित्रता दिवस पर विशेष सच्चा मित्र वह ही होता है जिसके साथ हम सुख–दुख में समाहित होते हैं। जिसे के समक्ष हम अपने हृदय के भावों को बिना किसी संकोच के प्रकट कर सकें। मित्रता में पाप और पुण्य की गवाही आसानी से होती है। मित्रता में स्वयं की पराजय को स्वीकार करने में किसी

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हमारी सांझीवालता

हमारी सांझीवालता गुरु नानक शाह फकीर, हिंदुओं के गुरु मुस्लिमों के पीर। सिख धर्म के संस्थापक प्रथम ‘श्री गुरु नानक देव साहिब जी’ का अवतार जगत के कल्याण के लिए हुआ था। आप जी ने अपनी चार उदासी यात्राओं से लगभग 36000 माइल्स की यात्रा कर आम लोगों को जाति, वर्ण और छुआछूत के भेदभाव

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अनुभव अर्श के……

मोह अर्थात् क्या? वो जान लगाने के बाद ही समझा जा सकता है। प्रेम अर्थात क्या? वो स्वयं को होने के बाद ही समझा जा सकता है। बिरहा अर्थात क्या? प्रेम के रंगों में सराबोर होने के पश्चात ही समझा जा सकता है। जीत अर्थात क्या? वह हारने के पश्चात ही समझा जा सकता है।

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