गुरमत की ज्योति से आलोकित हुआ बीदर : श्री नानक झीरा साहिब में पाँच दिवसीय गुरमत रेजिडेंशियल कैंप का सफल आयोजन
कर्नाटक के ऐतिहासिक एवं पावन तीर्थस्थल गुरुद्वारा श्री नानक झीरा साहिब में 25 से 29 मई 2026 तक आयोजित पाँच दिवसीय गुरमत रेजिडेंशियल कैंप ने सिक्खी संस्कारों, अनुशासन और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत वातावरण निर्मित किया। गुरुद्वारा साहिब के अध्यक्ष डॉ. बलवीर सिंघ, प्रबंधक सरदार जगजीत सिंघ, हेड ग्रंथी ज्ञानी हरपाल सिंघ, माता हरजीत कौर, कैंप सुपरवाइज़र ज्ञानी मदन सिंघ, हजूरी रागी जत्था तथा गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के समर्पित सदस्यों के सहयोग से आयोजित इस विशेष शिविर में कर्नाटक एवं तेलंगाना के लगभग एक सौ बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर गुरमत की अमूल्य शिक्षा प्राप्त की।
शिविर का उद्देश्य केवल धार्मिक ज्ञान प्रदान करना नहीं था अपितु बच्चों के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना भी था। प्रतिदिन अमृत वेला में बच्चों द्वारा स्वयं दीवान सजाया जाता था। नितनेम की वाणियों के पाठ उपरांत चाय और लंगर की व्यवस्था होती थी। इसके पश्चात प्रातः 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक गुरमत, कीर्तन तथा गतका की नियमित कक्षाएँ संचालित की जाती थीं। विश्राम के बाद पुनः दोपहर और सायंकालीन सत्रों में प्रशिक्षण चलता था। शाम को बच्चे स्वयं रेहरास साहिब का पाठ, कीर्तन और दीवान की सेवा संभालते थे। इस प्रकार पूरे शिविर का वातावरण आध्यात्मिक अनुशासन और सेवा-भावना से ओतप्रोत रहा।
सिख समुदाय के सुप्रसिद्ध प्रचारक ज्ञानी कोमल सिंह रामदासपुर वाले ने बच्चों को सिख धर्म, सिख इतिहास, गुरु साहिबान के जीवन, काव्य एवं गुरमत के मूल सिद्धांतों का सरल और प्रभावी ज्ञान प्रदान किया। उन्होंने कैंप के एक्टिविटी इंचार्ज के रूप में बच्चों को विभिन्न गतिविधियों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं ज्ञानी गुरप्रीत सिंह जी पटियाला वाले ने बच्चों को कीर्तन की विधिवत शिक्षा दी और उन्हें गुरबाणी गायन की मधुर परंपरा से जोड़ा। गतका कोच ज्ञानी परमिंदर सिंह जी ने बच्चों को सिख युद्धकला गतका का व्यावहारिक प्रशिक्षण देते हुए आत्मरक्षा, साहस और अनुशासन के गुणों से परिचित कराया। सरदार राजेश सिंह तलवार जी ने विशेष रूप से पगड़ी एवं दुमाला सजाने की कला का प्रशिक्षण देकर बच्चों में सिक्खी स्वरूप के प्रति गर्व और सम्मान की भावना विकसित की।
शिविर के दौरान बच्चों को अनुशासन, सेवा, सदाचार, अमृत वेला की महत्ता, नाम सिमरन, सिख जीवन मूल्यों तथा व्यवहारिक जीवन में गुरमत के अनुप्रयोग की शिक्षा दी गई। नाम सिमरन की विधि और उसके आध्यात्मिक लाभों को भी विस्तारपूर्वक समझाया गया। सिख बच्चों के उत्साह और प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के लिए सिक्खी स्वरूप प्रतियोगिता, पगड़ी बांधने की प्रतियोगिता, गतका प्रतियोगिता, चित्रकला प्रतियोगिता तथा गुरमत क्विज़ जैसी अनेक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिनमें प्रतिभागियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
29 मई 2026 को गुरुद्वारा साहिब के दीवान हॉल में एक भव्य समापन समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर इन सिख बच्चों ने गतका प्रदर्शन के माध्यम से अपनी दक्षता का परिचय दिया। सिख इतिहास और मूल्यों पर आधारित नाट्य प्रस्तुति ने उपस्थित संगत को भाव-विभोर कर दिया। बच्चों द्वारा प्रस्तुत कविताएँ, कीर्तन और गुरमत संबंधी कार्यक्रमों ने समारोह की गरिमा को और बढ़ा दिया। प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले बच्चों को विशेष सम्मान प्रदान किया गया। साथ ही सभी प्रतिभागियों, शिक्षकों, स्वयंसेवकों, रागी सिंह साहिबान और सेवा में समर्पित कार्यकर्ताओं को भी सम्मानित कर उनके योगदान का अभिनंदन किया गया।
शिविर की समाप्ति के उपरांत गुरुद्वारा साहिब के अध्यक्ष डॉ. बलवीर सिंघ जी सभी बच्चों, शिक्षकों और स्वयंसेवकों को अपने विंटेज रिसॉर्ट लेकर गए, जहाँ बच्चों के मनोरंजन हेतु विविध खेलों और गतिविधियों का विशेष प्रबंध किया गया था। बच्चों ने पूरे उत्साह और आनंद के साथ इस अविस्मरणीय अवसर का भरपूर आनंद लिया। उनके लिए विशेष रूप से स्वादिष्ट अल्पाहार और रात्रि भोज की व्यवस्था भी की गई थी। दिनभर की खुशियों और मधुर स्मृतियों को अपने साथ संजोए बच्चे जब पुनः गुरुद्वारा साहिब पहुँचे, तब उन्हें स्नेहपूर्वक विदाई दी गई।
यह गुरमत रेजिडेंशियल कैंप केवल एक प्रशिक्षण शिविर नहीं था, अपितु आने वाली पीढ़ी के हृदयों में गुरमत, सेवा, अनुशासन और सिक्खी के प्रति प्रेम का बीजारोपण करने वाला एक प्रेरणादायी अभियान सिद्ध हुआ। निस्संदेह, ऐसे आयोजन भविष्य में सिख समाज की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।