गुरुवाणी : श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी

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गुरुवाणी : श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी

भूमिका-

श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी केवल एक धर्मग्रंथ नहीं, बल्कि मानवता के लिए उच्चतम आध्यात्मिक चेतना का शाश्वत घोष है। इस पावन ग्रंथ में संकलित गुरुवाणी न किसी काल की बंधक है, न किसी भूगोल की, यह सीधे मनुष्य के अंतःकरण से संवाद करती है। इसी दिव्य परंपरा में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी एक ऐसी गहन अनुभूति है, जो वैराग्य, निर्भयता, आत्मबोध और सत्य के लिए सर्वस्व अर्पण करने की चेतना को शब्द देती है। यह सृष्टि परिवर्तन का निरंतर प्रवाह है, क्षण-क्षण रूपांतरित होती हुई। इसी परिवर्तनशील संसार में कुछ व्यक्तित्व अपने गुणों, साधना और सेवा से ऐसा स्थायी प्रभाव छोड़ जाते हैं, जो विस्मृत नहीं होता। ऐसे ही गुणवान संग का मिलन मनुष्य को आनंद, संतुलन और सृजन की दिशा देता है। सतिगुरु की कृपा और मेरी टीम खोज – विचार के साथियों की हौसला-अफज़ाई से आरंभ हुआ यह विनम्र उपक्रम उसी परंपरा का विस्तार है, जिसमें सेवा का आरंभ भी गुरु-कृपा से होता है और पूर्णता भी उन्हीं के आशीर्वाद से प्राप्त होती है।

भारतीय संस्कृति के गौरव-स्तंभ श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी आध्यात्मिक गहराई और मानवीय संवेदना का अद्वितीय संगम है। श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी संख्या में भले ही सीमित हो, पर भाव में अथाह है। यह वाणी मनुष्य को संसार से भागने की नहीं, बल्कि संसार में रहते हुए निर्लिप्त, निर्भीक और विवेकपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा देती है। भय, मोह, लोभ और अहंकार, इन सबके परे खड़े होकर सत्य का वरण करना ही इस वाणी का मूल स्वर है। गुरु साहिब ने पंद्रह रागों में 59 शबद (चौपदे) तथा 57 श्लोकों की रचना कर मानव-चित्त की सूक्ष्म अनुभूतियों को स्वरबद्ध किया। निश्चित ही यह गुरुवाणी समय की भावनाओं को स्वर देते हुए चिरकाल तक साधक को मार्गदर्शन प्रदान करती हैं। इस स्तंभ का उद्देश्य गुरु-वाणी को अर्थ-सहित, राग-संरचना के अनुशासन में प्रस्तुत करना है ताकि गायक, साधक और अध्येता, सभी इसके रस और रहस्य से लाभान्वित हों। श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी को गुरमत संगीत की दृष्टि से डिजिटलीकरण करने का यह प्रयास न केवल विशिष्ट है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उपयोगी सिद्ध होगा। गुरुकृपा से यह सेवा संगत के हृदय तक पहुँचे, यही मंगलकामना है।

इस स्तंभ की आवश्यकता

मेरे ब्लॉग arsh.blog पर चल रही सफ़र-ए-पातशाही नौवीं (जीवन प्रसंग) तथा शहीदी मार्ग यात्रा (ऐतिहासिक स्थल) श्रृंखलाएँ श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के जीवन और शहादत को ऐतिहासिक दृष्टि से प्रस्तुत करती हैं। परंतु गुरु साहिब को सम्पूर्णता में समझने के लिए उनके शब्दों से साक्षात्कार अनिवार्य है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए यह स्वतंत्र स्तंभ—“गुरुवाणी : श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी”- प्रारंभ किया जा रहा है, ताकि पाठक गुरु साहिब के जीवन-दर्शन को उनके अपने शब्दों में अनुभव कर सकें।

प्रस्तुति की मर्यादा (Editorial Discipline)

इस स्तंभ में गुरुवाणी की प्रस्तुति पूर्ण श्रद्धा, मर्यादा और शास्त्रीय अनुशासन के साथ की जाएगी।

1. मूल गुरुवाणी केवल गुरुमुखी और हिंदी लिपि में प्रस्तुत की जाएगी।

2. हिंदी और गुरुमुखी के अर्थ शाब्दिक न होकर, भाव-निष्ठ और पाठक-अनुकूल होंगे।

3. अंग्रेज़ी भाग (जहाँ दिया जाएगा) केवल Meaning / Context तक सीमित रहेगा—मूल शबद / वाणी को अंग्रेज़ी में नहीं लिखा जाएगा।

4. किसी भी शबद / वाणी में व्यक्तिगत कल्पना, व्याख्या या अतिशयोक्ति का प्रवेश नहीं होगा।

5. गुरुवाणी को किसी ऐतिहासिक या वैचारिक सिद्धांत के समर्थन के लिए नहीं, बल्कि स्वयं अपने प्रकाश में प्रस्तुत किया जाएगा।

यह स्तंभ प्रचार नहीं, प्रस्तुति का प्रयास है, व्याख्यान नहीं, विनम्र साक्षात्कार है।

स्तंभ की संरचना (Structure of Each Entry)

इस कॉलम में प्रत्येक गुरुवाणी प्रविष्टि निम्न क्रम में प्रस्तुत होगी:

  • गुरुवाणी (मूल पाठ – गुरुमुखी और हिंदी)
  • हिंदी और गुरूमुखी अर्थ / भावार्थ
  • English Meaning / Context (संक्षेप में, जहाँ आवश्यक हो)
  • इस कैटेगरी में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी द्वारा गुरुवाणी को गुरुमत संगीत के रागों के अनुसार क्रमबद्ध कर तालिका की मदद से प्रस्तुत करने का अभिनव प्रयास टीम खोज-विचार के द्वारा किया जा रहा है| 

इस संरचना का उद्देश्य यह है कि-

  • पंजाबी और हिंदी के पाठकों को मूल स्वर मिले 
  • हिंदी और गुरुमुखी के पाठकों को भाव की स्पष्टता 
  • हिंदी अर्थ (+ English Context) से अंतरराष्ट्रीय पाठकों को संदर्भ की दिशा

निश्चित ही इस संपूर्ण गुरुवाणी के डिजिटलीकरण से पाठकों और शोधार्थियों को अत्यंत सुविधा प्राप्त होगी

पाठकों से विनम्र निवेदन

यह गुरुवाणी-स्तंभ किसी एक भाषा, वर्ग या भूगोल के लिए नहीं है। यह उस मानव चेतना के लिए है, जो भय के समय साहस ढूँढती है, और शोर के युग में मौन की शरण लेना चाहती है। निवेदन है कि इस वाणी को- केवल पढ़ें नहीं, ठहर कर अनुभव करें, शब्दों से अधिक अर्थ की गूंज सुनें और जहाँ संभव हो, इसे जीवन में उतारने का प्रयास करें

स्त्रोत: 1.श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी, 2. गुरुमुखी पुस्तक: हिंद की चादर गुरु तेग़ बहादुर जी- जीवन, चिंतन और वाणी, लेखक- प्रो. बिक्रम सिंघ घुमण 3. गुरु तेग बहादुर वाणी विश्लेषण, लेखक- डॉ॰ रतन सिंघ जग्गी. डॉ॰ गुरशरण कौर जग्गी 4. लेखक- गुरुमत संगीत के विद्वान सरदार जसपाल सिंघ जी।

स्त्रोत

1. श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी

2. गुरुमुखी पुस्तक
हिंद की चादर — गुरु तेग़ बहादुर जी : जीवन, चिंतन और वाणी
लेखक: प्रो. बिक्रम सिंह घुमण

3. गुरुमुखी पुस्तक
गुरु तेग बहादुर वाणी विश्लेषण
लेखक: डॉ॰ रतन सिंह जग्गी, डॉ॰ गुरशरण कौर जग्गी

4. गुरुमुखी पुस्तक
लेखक: गुरुमत संगीत के विद्वान — सरदार जसपाल सिंह जी

-डॉ. रणजीत सिंह ‘अर्श’

-लेखक / ब्लॉगर / व्याख्याता
arsh.blog


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