राज भाषा हिंदी के सच्चे सपूत
उम्दा और असाधारण व्यक्तित्व के धनी, मृदभाषी डॉक्टर शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख (अध्यक्ष: विश्व हिंदी साहित्य सेवा संघ, मुख्य कार्यालय प्रयागराज) का आकस्मिक निधन दिनांक 27/02/24 शाम को पुणे में हो गया| आप जी राजभाषा हिंदी के अनुरागी एवं देश के जाने-माने प्रख्यात हिंदी के विद्वान थे| नागरी लिपि परिषद एवं हिंदी साहित्य सेवा संघ में आप अपने जीवन को समर्पित कर तन-मन-धन से राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार में जुटे हुए थे| देश- को समर्पित इन हिंदी के विद्वानों की संस्थाओं में कार्यरत रहते हुए आप जी ने देश-विदेश के सभी हिंदी के प्रख्यात विद्वान, साहित्यकार, लेखक, कवि और प्राध्यापकों को एक सूत्र में बांध लिया है| निश्चित ही आपके इस परोपकारी, तपस्वी जीवन के कारण राजभाषा हिंदी को नए आयाम प्राप्त हुए| वृद्धावस्था में भी आप जी लगातार एक युवक की तरह देशाटन कर, इस महान कार्य में अपने जीवन की आहुति समर्पित कर रहे थे| निश्चित ही आपके आकस्मिक निधन से हिंदी साहित्य जगत में शोक की लहर है| देश-विदेश के सभी साहित्यकार मित्र एक दूसरे से वार्तालाप कर, नम आंखों से आपको श्रद्धा-सुमन अर्पित कर रहे हैं|
प्राचार्य डॉ. शहाबुद्दीन शेख जी का रविवार दि. 13 दिसंबर 1953 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले से संलग्नित पारनेर तहसील के पिंपळगाव तुर्क नामक ग्राम में जन्म हुआ था| आपके पिताजी प्राथमिक शिक्षक थे। उनकी प्राथमिक शिक्षा चारी नं.15, (तहसील राहता), जखनगाव (तहसील अहमदनगर), पिंपलगांव तुर्क (तहसील पारनेर), करंदी (तहसील पारनेर) में संपन्न हुई। माध्यमिक शिक्षा जनता विद्या मंदिर कान्हूर पठार (तहसील पारनेर), स्नातक स्तर की शिक्षा न्यू आर्ट्स, कॉमर्स एन्ड साईंस कॉलेज, अहमदनगर में तथा स्नातकोत्तर शिक्षा अहमदनगर महाविद्यालय, अहमदनगर में संपन्न हुई। रयत शिक्षण संस्था, सातारा से संलग्नित श्रीरामपुर (जि. अहमदनगर) के स्वामी सहजानंद भारती
शिक्षा महाविद्यालय से डॉ. शेख जी ने बीएड. की शिक्षा प्राप्त की। डॉ. शहाबुद्दीन शेख जी की प्राथमिक शिक्षा से लेकर स्नातकोत्तर व एम.फिल, पीएच.डी. उपाधि तक मार्गदर्शन करने वाले समस्त अध्यापक गणों में मुख्यतः देशपांडे गुरुजी, स्वयं उनके पिता जी हाजी नियाज मोहम्मद शेख, ठिपसे गुरु जी, बागल गुरुजी, शिवराम शिंदे गुरुजी, दशरथ दगडू ठुबे गुरुजी तथा शिवाजी चोपडे, दशरथ वामन, पोपट पिसोटे, महेश शेरमाळे, शिवाजी येसुगडे आदि अध्यापक है। महाविद्यालयीन स्तर पर प्राचार्य डॉ. ह. कि. तोडमल, प्रा. जायसवाल, प्रा. चौधरी, प्रा. मेहते, प्रा. एस.डी. सोलापुर, डॉ. बालकृष्ण बरहाटे, डॉ. अरुण कुंभारे, डॉ. दयानंद शर्मा, डॉ.श.के. आडकर तथा डॉ. मोहम्मद आजम तथा प्रा. लक्ष्मण हर्दवाणी आदि का मार्गदर्शन मिला है। शिक्षा महाविद्यालय में प्राचार्य वसंतराव रोकड़, प्रा. नानकर, प्रा. अनारसे, प्रा. नजमा मणेर आदि उनके सम्मानित अध्यापक रहें।
डॉ. शहाबुद्दीन शेख जी ने फर्ग्युसन महाविद्यालय, पुणे के हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद महादेव परळीकर के निर्देशन में एम.फिल. उपाधि तथा अहमदनगर महाविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद आजम के निर्देशन में पीएचडी. शोधा पाधी पुणे विश्वविद्यालय के अंतर्गत प्राप्त की। डॉ. शहाबुद्दीन शेख जी ने 15 जुलाई सन 1978 ई. को श्री ज्ञानेश्वर विद्या प्रसारक मंडल संचलित श्री ज्ञानेश्वर महाविद्यालय, नेवासा में कनिष्ठ महाविद्यालय प्राध्यापक के रूप में अपनी अध्यापकीय सेवा आरंभ की थी। सौभाग्य से 1 सितंबर सन 1984 ई से वे उसी महाविद्यालय में वरिष्ठ महाविद्यालय व्याख्याता पद पर नियुक्त हुए। 30 जून सन 2008 ई. तक वे इसी महाविद्यालय में कार्यरत रहे। तत्पश्चात् डॉ. शहाबुद्दीन शेख जी ने 1 जुलाई सन 2008 ई. से 3 जून सन 2010 ई. तक स्थानांतरण के रूप में मुळा एज्युकेशन सोसायटी के कला, वाणिज्य व विज्ञान महाविद्यालय, सोनई में अपनी अध्यापकीय सेवाएँ अर्पित की। तत्पश्चात् 4 जून सन 2010 ई. से 3 जून सन 2011 ई. तक मौलाना आजाद शिक्षा संस्था के कला व विज्ञान महाविद्यालय, औरंगाबाद एवं 4 जून सन 2011 ई. से 31 दिसंबर सन 2018 ई. तक लोकसेवा एज्युकेशन सोसायटी, बुलढाणा संचालित लोकसेवा कला व विज्ञान महाविद्यालय, औरंगाबाद में प्राचार्य पद पर नियुक्त होकर अपनी प्रशासनिक सेवाएँ दी। इस अवधि में उन्होंने मौलाना आजाद शिक्षा संस्था की अध्यक्षा पद्मश्री फातिमा जकेरिया, महासचिव डॉ. मकदूम फारुकी, लोकसेवा एज्युकेशन सोसायटी के संस्थापक तथा पूर्व विधायक अली जनाब एम. एम. शेख साहब, संस्था के अध्यक्ष शेख अब्बास शेख लाल पटेल के कुशल मार्गदर्शन में अपनी सकीय व सुचारु रूप से सेवाएँ दी। डॉ. शहाबुद्दीन शेख जी कुल 40 वर्ष 6 महिने अध्यापकीय क्षेत्र से जुड़े रहें। पूर्व सांसद श्री. यशवंतरावजी गडाख पाटील के कुशल मार्गदर्शन में कार्यरत मुळा एज्युकेशन सोसायटी के नेवासा तथा सोनई महाविद्यालय में अध्यापकीय सेवा देते समय डॉ. शहाबुद्दीन शेख जी को प्राचार्य डॉ. श्री. वि कडवेकर, प्राचार्य डॉ. र. कि. आगळे, प्राचार्य पी. एन कुलकर्णी, प्राचार्य भागवत बऱ्हाटे, प्राचार्य डॉ.भीमराव कांबळे, प्राचार्य डॉ. अशोक एरंडे, प्राचार्य डॉ. भाऊ साहेब गवळी, प्राचार्य डॉ. गोरक्षनाथ कल्हापुरे तथा प्राचार्या डॉ. वैशाली रोकडे इन नौ प्राचार्य महोदयों के सफल मार्गदर्शन में अध्यापकीय सेवा में कार्यरत होने का सुअवसर प्राप्त हुआ।
डॉ. शहाबुद्दीन शेख जी ने विश्वविद्यालय स्तर पर भी अपनी अकादमिक सेवाएँ दी है। वे पुणे विश्वविद्यालय, पुणे के हिंदी अध्ययन मंडल के अध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अतिरिक्त देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर तथा राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय, नागपुर के हिंदी शोधा पाधी समिति के बाह्य विशेषज्ञ के रूप में सदस्य रह चुके है। सम्प्रति वे सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय, पुणे तथा पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर सोलापुर विश्वविद्यालय, सोलापुर के हिंदी अध्ययन मंडल के सदस्य के रूप में कार्यरत हैं।
प्राचार्य डॉ. शहाबुद्दीन शेख जी सन 1984 ई. से अब तक विभिन्न स्वैच्छिक हिंदी संस्थाओं से जुड़कर राष्ट्रभाषा हिंदी व राष्ट्रीय लिपि देवनागरी के प्रचार-प्रसार व विकास कार्य में सक्रिय रूप से योगदान दे रहे है। वे विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज (इलाहाबाद) एवं राष्ट्रीय हिंदी सेवी महासंघ, इंदौर (म.प्र.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। तथा नागरी लिपि परिषद, नई दिल्ली व राष्ट्रीय हिंदी परिषद, मेरठ (उ.प्र.) के उपाध्यक्ष थे। इन संस्थाओं के माध्यम से नागरी लिपि सम्मेलनों और अनेक राष्ट्रीय नागरी लिपि संगोष्ठियों का सफल आयोजन इनके मार्गदर्शन में हुआ है। हिंदी शिक्षण योजना, राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में डॉ. शेख जी ने अनेक केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों एवं उपक्रम कार्यालयों के कर्मचारियों को हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान देकर उन्हें प्रशिक्षित किया। लोकसेवा सामाजिक प्रतिष्ठान, औरंगाबाद के अध्यक्ष होने के नाते उन्होंने पूर्व विधायक एम. एम. शेख साहेब के कुशल मार्गदर्शन में दो वर्ष तक सामूहिक विवाहों का सफल आयोजन किया था, जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख जी और अन्य मंत्री महोदयों की विशेष उपस्थिति रही|
डॉ. शहाबुद्दीन शेख जी को अनेक पुरस्कारों एवं सम्मानों से विभूषित होने का अवसर प्राप्त हुआ था। अब तक वे राज्य व राष्ट्रीय स्तर के 45 पुरस्कारों एवं सम्मानों से अलंकृत हो चुके थे। जिनमें अहमदनगर जिला परिषद का ‘आदर्श शिक्षक पुरस्कार’, पुणे विश्वविद्यालय, पुणे का ‘सर्वोत्कृष्ट शिक्षक पुरस्कार’ तथा महाराष्ट्र सरकार का ‘राज्य शिक्षक पुरस्कार’ प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त नागरी लिपि परिषद, नई दिल्ली का ‘विनोबा नागरी पुरस्कार’, विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान इलाहाबाद का ‘शिक्षक श्री’, राष्ट्रीय हिंदी परिषद मेरठ का ‘हिंदी रत्न’, राजभाषा संघर्ष समिति, नई दिल्ली का ‘राजभाषा सम्मान’, महाराष्ट्र हिंदी परिषद का ‘सारस्वत सम्मान’, भारतीय दलित साहित्य अकादमी, नई दिल्ली का भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर फेलोशिप सम्मान’, अखिल भारतीय राष्ट्रभाषा विकास संगठन गाजियाबाद का ‘राष्ट्रभाषा संरक्षक सम्मान, ‘ऑल इंडिया नेशनल यूनिटी कॉन्फ्रेंस, नई दिल्ली का राष्ट्रीय एकता अवार्ड तथा प्रियंका चैरिटेबल ट्रस्ट दहिसर, मुंबई का पंडित वंश नारायण मिश्र आदर्श शिक्षक सम्मान आदि से उन्हें सम्मानित किया गया है।
डॉ. शहाबुद्दीन शेख जी के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में अब तक लगभग 50 की संख्या में शोध लेख तथा 20 आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। डॉ. शेख जी के द्वारा संपादित ग्रंथों की संख्या 15 है। 7 आंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों, 4 अखिल भारतीय संमेलनों 2 हिंदीतर भाषी हिंदी नवलेखक शिबिरों, 3 अंतर्राष्ट्रीय एकता संगोष्ठियों, 22 क्षेत्रीय नागरी लिपि संगोष्ठियों, 25 नागरी लिपि प्रशिक्षणों के डॉ. शेख जी आयोजक रह चुके हैं। इसी प्रकार वे 6 आंतरराष्ट्रीय संमेलनों 60 राष्ट्रीय संगोष्ठियों, 20 राज्यस्तरीय संगोष्ठियों, 7 हिंदी नवलेखक शिविरों तथा 27 अखिल भारतीय नागरी लिपि संमेलनों, 4 राष्ट्रीय गोष्ठियों, 9 अखिल भारतीय विश्वविद्यालय कैम्पों तथा अन्य 25 से अधिक आयोजनों में वे सहभाग ले चुके है। पुणे, औरंगाबाद तथा अहमदनगर आकाशवाणी केंद्र से उनकी 25 वार्ताएँ प्रसारित हो चुकी है। मुंबई दूरदर्शन से भी उनकी साहित्यिक चर्चा प्रसारित हो चुकी है। देश के विभिन्न महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में डॉ. शहाबुद्दीन शेख जी ने विभिन्न विषयों पर 100 से अधिक व्याख्यान दिये हैं।
शोध निर्देशक के रूप में भी डॉ. शहाबुद्दीन शेख जी ने अपनी उल्लेखनीय सेवाएं अर्पित की है। उनके सुचारू निर्देशन में अब तक 30 शोधार्थियों ने पीएच. डी. उपाधि प्राप्त की है, जिनमें सावित्रि बाई फुले विश्वविद्यालय, पुणे से 15, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय, औरंगाबाद से 11, जेजेबी विश्वविद्यालय के 3 तथा तिलक महाराष्ट्र विद्यापीठ, पुणे से 1 शोधार्थी का समावेश है। इसके अतिरिक्त उन्होंने विभिन्न विश्वविद्यालयों के पीएचडी. के 40 शोधप्रबंधों तथा एम.फिल. के 20 लघु शोध प्रबंध का भी बाह्य परीक्षक के रूप में मूल्यांकन किया है।
प्राचार्य डॉ. शहाबुद्दीन शेख जी का पारिवारिक जीवन भी समृद्ध रहा| पत्नी नजमुन्निसा शिक्षित होकर गृहिणी के रूप में पारिवारिक दायित्व संभाल रही है| बड़े दामाद रियाज खान एम.बी.ए. कराकर आर.एम.सी. सिमेंट कंपनी, पुणे में वरिष्ठ प्रबंधक के रूप में कार्यरत है। छोटी पुत्री असीम आरा ने एम.सी.ए. की उपाधि पाकर कुछ दिन टेक महिंद्रा कंपनी में नौकरी करके वह भी पारिवारिक जिम्मेदारी संभाल रहे है। छोटे दामाद अफजल ने बी.ई. की उपाधि प्राप्त कर वे आज पुणे एटॉस कंपनी के अंतर्गत तकनीकी आरेखक के पद पर नियुक्त है। डॉ. शेख जी के छोटे भाई राज मुहम्मद रांजणगांव गणपति (जिला पुणे) के मंगल मूर्ति विद्या धाम में पर्यवेक्षक के रूप में कार्यरत है। भतीजा अजीम एचसीएल कंपनी बेंगलुरु में ‘आधार विभाग’ में प्रबंधक है।
डॉ दीपा दत्तात्रेय कुछएकर नासिक, प्राध्यापक डॉ अशोक गायकवाड, हिंदी की प्रसिद्ध साहित्यकार लखनऊ निवासी रश्मि लहर, मुजफ्फरपुर बिहार की साहित्य कार रजनी प्रभा एवं प्राचार्य डॉ. शहाबुद्दीन शेख जी के अनेक प्रतिभाशाली छात्रों ने दुख प्रकट कर अपनी संवेदनाओं को संप्रेषित किया है| देश के सभी हिंदी प्रेमी हिंदी साहित्य के इस कोहिनूर हीरे को अपनी नम आंखों से श्रद्धा के सुमन अर्पित करते हैं|
निश्चित ही इस दुखद घड़ी में मैं अपनी कलम को बल देकर मां सरस्वती को हाजिर-नाजिर मानकर लिख रहा हूँ की प्राचार्य डॉ. शहाबुद्दीन शेख जी. . . . .
आपका था मिलनसार मित्रता पूर्ण व्यवहार,
हृदय में हिंदी की सेवा, समर्पण का जज़्बा और करुणा अपार।
नागरी लिपि और विश्व हिंदी साहित्य सेवा संघ का हर आदेश था उन्हें स्वीकार,
ऐसे थे प्राचार्य डॉ. शहाबुद्दीन शेख जी हमारे हिंदी जगत के निष्काम सेवादार।
माँ भारती के ऐसे लाल को एक बार फिर से, नम आंखों से श्रद्धा-सुमन!
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डॉ. शहाबुद्दीन शेख: हिंदी भाषा के एक सच्चे साधक के प्रथम पुण्यस्मरण पर विशेष-
हिंदी भाषा और साहित्य जगत में अपूरणीय योगदान देने वाले मृदुभाषी, विद्वान और समर्पित व्यक्तित्व डॉ. शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख का आकस्मिक निधन 27 फरवरी 2024 को पुणे में हो गया। उनके निधन से हिंदी भाषा प्रेमियों, साहित्यकारों और शिक्षाविदों में गहरी शोक की लहर दौड़ गई। वे न केवल एक प्रतिष्ठित विद्वान थे, बल्कि हिंदी भाषा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए समर्पित एक सच्चे साधक भी थे।
जीवन परिचय और प्रारंभिक शिक्षा-
डॉ. शहाबुद्दीन शेख का जन्म 13 दिसंबर 1953 ई. को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के पारनेर तहसील के पिंपलगांव तुर्क ग्राम में हुआ था। वे एक शिक्षाविद परिवार से थे, जहाँ शिक्षा को विशेष महत्व दिया जाता था। उनके पिता हाजी नियाज मोहम्मद शेख एक प्राथमिक शिक्षक थे, जिन्होंने अपने पुत्र को शिक्षा का मूल्य समझाया और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
डॉक्टर शेख ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा चारी नं. 15 (तहसील राहता), जखनगांव (तहसील अहमदनगर), पिंपलगांव तुर्क (तहसील पारनेर) और करंदी (तहसील पारनेर) में प्राप्त की।
माध्यमिक शिक्षा जनता विद्या मंदिर, कान्हूर पठार में पूरी करने के बाद उन्होंने स्नातक स्तर की शिक्षा न्यू आर्ट्स, कॉमर्स एंड साइंस कॉलेज, अहमदनगर से पूर्ण की। इसके बाद, उन्होंने स्नातकोत्तर शिक्षा अहमदनगर महाविद्यालय, अहमदनगर से प्राप्त की।
उच्च शिक्षा और शोध कार्य-
डॉ. शेख की विद्वता केवल स्नातकोत्तर शिक्षा तक सीमित नहीं रही। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में गहरी रुचि रखते हुए एमफिल और पीएचडी. की उपाधि प्राप्त की। फर्ग्युसन महाविद्यालय, पुणे के हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद महादेव परळीकर के निर्देशन में उन्होंने एम.फिल की उपाधि प्राप्त की, और अहमदनगर महाविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद आजम के निर्देशन में उन्होंने पुणे विश्वविद्यालय से पीएचडी. की उपाधि अर्जित की।
शिक्षण एवं प्रशासनिक योगदान-
शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में अपनी सेवाएं देते हुए डॉ. शहाबुद्दीन शेख ने 15 जुलाई 1978 को श्री ज्ञानेश्वर महाविद्यालय, नेवासा में कनिष्ठ प्राध्यापक के रूप में अपनी शिक्षकीय यात्रा शुरू की। उनका समर्पण और ज्ञान उन्हें शीघ्र ही वरिष्ठ व्याख्याता के पद पर ले गया। 1 सितंबर 1984 से लेकर 30 जून 2008 तक वे इसी महाविद्यालय में कार्यरत रहे। इसके पश्चात, 1 जुलाई 2008 से 3 जून 2010 तक उन्होंने मुळा एज्युकेशन सोसायटी के कला, वाणिज्य व विज्ञान महाविद्यालय, सोनई में अपनी सेवाएं प्रदान की। उन्होंने अपने प्रशासनिक कौशल का प्रदर्शन करते हुए विभिन्न महाविद्यालयों में प्राचार्य के रूप में भी कार्य किया। 4 जून 2010 ई. से 3 जून 2011 ई. तक मौलाना आजाद शिक्षा संस्थान, औरंगाबाद में उन्होंने प्राचार्य के रूप में कार्यभार संभाला। इसके बाद, 4 जून 2011 ई. से 31 दिसंबर 2018 ई. तक वे लोकसेवा एज्युकेशन सोसायटी द्वारा संचालित लोकसेवा कला व विज्ञान महाविद्यालय, औरंगाबाद में प्राचार्य के रूप में कार्यरत रहे।
हिंदी भाषा के प्रति समर्पण-
डॉ. शहाबुद्दीन शेख न केवल एक उत्कृष्ट शिक्षक थे, बल्कि वे हिंदी भाषा और साहित्य के सशक्त प्रचारक भी थे। वे विश्व हिंदी साहित्य सेवा संघ के अध्यक्ष थे और इस संस्था के माध्यम से उन्होंने हिंदी के प्रचार-प्रसार में अभूतपूर्व योगदान दिया। वे नागरी लिपि परिषद और हिंदी साहित्य सेवा संघ से भी सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे। उनके प्रयासों ने देश-विदेश के हिंदी विद्वानों, साहित्यकारों, लेखकों, कवियों और प्राध्यापकों को एक सूत्र में बाँधने का कार्य किया। उनकी लगन और परिश्रम के कारण हिंदी भाषा को नए आयाम प्राप्त हुए। वृद्धावस्था में भी वे युवाओं की तरह देशाटन कर हिंदी भाषा की सेवा में संलग्न रहे। वे अपनी संपूर्ण ऊर्जा और समर्पण के साथ हिंदी को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए प्रयासरत थे।
अकादमिक एवं शोध कार्यों में योगदान-
डॉ. शेख ने विश्वविद्यालय स्तर पर भी अपनी उल्लेखनीय सेवाएँ प्रदान कीं। वे पुणे विश्वविद्यालय के हिंदी अध्ययन मंडल के अध्यक्ष रह चुके थे। इसके अतिरिक्त, वे देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर तथा राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय, नागपुर के हिंदी शोधा पाधी समिति के बाह्य विशेषज्ञ के रूप में सदस्य रह चुके थे।
डॉ. शेख का हिंदी साहित्य जगत में योगदान-
डाॅ. शेख ने कई महत्वपूर्ण शोध पत्र लिखे और हिंदी साहित्य पर गहन शोध किया। वे विभिन्न साहित्यिक पत्रिकाओं और शोध पत्रों में निरंतर लेखन करते रहे। उनके लेखन की विशेषता यह थी कि वे सरल और प्रभावशाली भाषा में गंभीर विषयों को प्रस्तुत करते थे। उनके विचारों में स्पष्टता और गहराई थी, जो पाठकों को सोचने पर मजबूर कर देती थी।
व्यक्तित्व और प्रेरणा स्रोत-
डॉ. शेख का व्यक्तित्व अत्यंत सरल, सहज और मृदुभाषी था। वे न केवल अपने छात्रों के प्रिय थे, बल्कि सहकर्मियों और विद्वानों के बीच भी अत्यंत सम्मानित थे।उनका व्यवहार हमेशा प्रेरणादायक और सहयोगी रहा। वे जीवन के अंतिम क्षण तक हिंदी भाषा की सेवा में समर्पित रहे।
डॉ. शेख के निधन से हुई अपूर्णीय क्षति-
डॉक्टर शेख के आकस्मिक निधन से हिंदी साहित्य जगत को अपूर्णीय क्षति हुई है। देश-विदेश के साहित्यकार, लेखक, कवि और विद्वान उनके जाने से शोकाकुल हैं। उनकी प्रेरणा और कार्य हिंदी भाषा प्रेमियों के लिए सदैव मार्गदर्शक बने रहेंगे। व्यक्तिगत रुप से मेरे जैसे लेखकों के लिए बहुत बड़ी क्षति है, आप जी मेरे मार्ग दर्शक और धर्म पिता समान थे|
श्रद्धांजलि संदेश-
डॉ. शहाबुद्दीन शेख के निधन से हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में एक युग का अंत हो गया। उनकी विद्वत्ता, सेवा भाव और समर्पण हिंदी साहित्य जगत के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेंगे।ईश्वर से प्रार्थना है कि वे उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें और उनके परिवार को इस कठिन समय में संबल प्रदान करें।
- हिंदी के ऐसे सच्चे साधक को विनम्र श्रद्धांजलि।

(पुणे के प्रथम सिख महापौर: सरदार मोहन सिंह राजपाल)
डाॅ शहाबुद्दीन जी के बारे में आपने एकदम सही लिखा है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।
आपका तहेदिल से आभार!