किसान मोर्चे का सच

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(लेख— प्रारंभ करने से पहले ही में स्पष्ट करना चाहता हूँ कि इसमें कोई राजनीति नहीं है परंतु सच आम लोगों के सम्मुख आना बहुत जरूरी है। एक आम नागरिक के यह अपने विचार है।)

आज पूरे देश में सरकार की गलत नीतियों के कारण त्राहि–त्राहि मची हुई है। यह हिटलर सरकार अपने सरफिरे अंदाज में लगातार गलत फैसले लेकर देश को पतन के गर्त में धकेल रही है। इस प्रधान सेवक को कौन से किसान संगठन ने इस कानून को बनाने के लिए निवेदन किया है? केवल ई.वी.एम. में हेराफेरी कर यह सरकार सत्ता पर आसीन है। अनर्गल सिखों पर आरोप कर उन्होंने पूरे विश्व में अपनी विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। कभी भी उठो नोटबंदी, NRC, CIA और ना जाने क्या–क्या??

इनकी मनमानी और गलत फैसलों से आम जनता में बहुत आक्रोश है। जिन सिखों ने अपनी ईमानदारी, शूरवीरता, सेवा, सिमरन और देशभक्ति के जज्बे से पूरे विश्व में एक मिसाल कायम की है। उन सिखों को यह अंधभक्त आतंकवादी कहकर पूरे देश का अपमान कर रहे हैं। कहां थे यह अंधभक्त जब देश की बहू–बेटियों को अब्दाली उठा कर ले जा रहा था? कहां थे यह अंधभक्त जब रोज औरंगजेब सवा मन जनेऊ तोलता था? कहां थे यह अंधभक्त जब कोरोना संकट मे देश का गरीब मजदूर पैदल चल रहा था? कहां थे यह अंधभक्त जब कोरोना संकट में लोग भूखे मर रहे थे? अरे कुछ तो शर्म करो !!

इतिहास गवाह कि इस देश की मिट्टी और इज्जत के लिए दस लाख से ज्यादा सिखों ने शहिदीयां प्राप्त की है।

आज पूरा देश एक वज्रमुठ की तरह किसानों के साथ कंधे से कंधा मिला कर खड़ा है। यदि आज नहीं जागोगे तो जो ₹25 किलो का आटा खाते हो वो ₹150 किलो का लेकर खाना पड़ेगा। सिर्फ खाना खाने के लिए आने वाली नस्लों को बंधुआ मजदूर की तरह जीवनयापन करना पड़ेगा। सरकार की मंशा है कि किसानों की उपज को प्राइवेट सेक्टर के अधीन कर इसे आयकर के अधीन लाया जाये ताकि सत्ता के दलाल फ्री की मलाई खा सकें। इन काले अंग्रेजों का डटकर मुकाबला करो। गुरु का सिख आतंकवादी नहीं सच्चा देशभक्त है। यदि आप इन विचारों से सहमत हैं तो इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करो और इन काले अंग्रेजों को देश के लोकतंत्र की ताकत दिखा दो।

याद रखो जहां जुल्म होगा उसके विरुद्ध गुरु का सिख तैयार–बर-तैयार होकर उससे मुकाबला करेगा!

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किसान मोर्चा और मुस्लिम भाईचारा

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